Rajasthan Election 2018 Updates: राजस्थान में मतदान खत्म, 72.14 फीसद हुई वोटिंग

राजस्थान  में शुक्रवार को विधानसभा चुनाव  (Rajasthan Assembly Elections 2018) के लिए मतदान होगा. 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा के लिए मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है, लेकिन कई जगह पर मुकाबले के त्रिपक्षीय हो जाने की अटकलें लग रहीं हैं. एक सीट पर प्रत्याशी के निधन के कारण 199 सीटों पर मतदान होगा.51965 पोलिंग सेंटर पर कुल 2274 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में कैद होगा. चुनाव परिणाम इस ओर संकेत दे सकते हैं कि आगामी वर्ष होने वाले आम चुनाव से पहले हवा का रुख किसकी ओर है. राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच काफी कड़ा मुकाबला है, यहां लोगों ने गत 20 वर्षो से एक कार्यकाल के बाद उसी पार्टी को दोबारा सत्ता में नहीं बिठाया है.राजस्थान में भाजपा सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है. राजस्थान में 4.74 करोड़ लोग मतदान करने के योग्य हैं. राजस्थान में सुबह 8 बजे से मतदान शुरू होगा. सभी विधानसभा क्षेत्रों में वीवीपैट का प्रयोग किया जाएगा. मतदाताओं के पास नोटा का भी विकल्प मौजूद होगा. राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. चुनाव नतीजे छत्तीसगढ़, मिजोरम और मध्यप्रदेश के साथ 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे.

राजस्थान / आज 7 दिसंबर है, आप निर्णायक भूमिका में यानी पंचपरमेश्वर हैं; इसलिए वोट जरूर करें

जयपुर. 15वीं राजस्थान विधानसभा के लिए 7 दिसंबर को मतदान होगा।राजस्थान विधानसभा की 200 में से 199 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान होगा। अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह का निधन होने की वजह से चुनाव टाल दिया गया है। आज आपका वोट अगले 5 साल तय करेगा। इसलिए अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटें।

बहाना 1 : मैं वोट देने नहीं जाऊंगा तो क्या फर्क पड़ेगा?

फर्क तो पड़ेगा : चुनाव में एक-एक वोट कीमती है। वर्ष 2008 में नाथद्वारा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता सीपी जोशी एक वोट से हार गए थे। अप्रैल 1999 में प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिर गई थी। 

Assembly Election 2018

बहाना 2 : प्रत्याशी अनाज थोड़े देंगे…क्यों वोट करूं?

इसलिए करें : मतदान करना अपना अधिकार है। अगर हम वोट नहीं डालेंगे तो कोई गलत आदमी चुनकर आ जाएगा।  गलत व्यक्ति के चुनकर आने का असर हमारी योजनाओं पर पड़ेगा। इसलिए वोट डालने के लिए जरूर जाएं।

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बहाना 3 : पसंद के प्रत्याशी नहीं हैं, क्यों वोट दूं?

नोटा तो है: अगर एक भी प्रत्याशी आपको पसंद नहीं है तो भी संविधान ने आपको वोट का हक किया है। आप वोट देने जाएं क्योंकि वहां नोटा भी एक विकल्प है। अगर नोटा को वोट ज्यादा मिले तो वहां दोबारा चुनाव कराए जाएंगे।

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बहाना 4 : बूथ घर से दूर है, वहां कैसे जाएंगे?

जाना ही चाहिए: थोड़ा परेशान होंगे,  पर वोट डालने जरूर जाएं। यह बहाना इसलिए नहीं चलेगा, क्योंकि कोई प्रत्याशी आपको बैठाकर ले जाएगा तो आप उसको वोट दे देंगे। इसलिए अपने अपने वाहन से जाएं और अपने विवेक से सही प्रत्याशी को वोट दें।

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बहाना 5 : अगली बार डाल देंगे वोट?

कल नहीं आता: वोट के जरिए लोकतंत्र को मजबूत करने का यह सुनहरा अवसर पांच साल में एक बार मिलता है। अगर इस बार चूके तो पांच साल इंतजार करना होगा। ऐसा सुनहरा अवसर हाथ से नहीं निकलने दें। 

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बहाना 6 : ऑफिस की छुट्टी है। आज तो पार्टी करते हैं। कहीं घूमने चलते हैं?

पहले वोट फिर मौज: पार्टी तो किसी भी दिन हो सकती है। लेकिन अच्छे भविष्य के लिए पार्टी की बजाय वोट डालने जाएं। जैसे सपरिवार पार्टी में जाते हैं। उसी प्रकार वोट डालने के लिए भी सपरिवार जाना चाहिए। 

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बहाना 7 : लाइन होगी…पता नहीं कब नंबर आएगा?

5 साल का सवाल: बिजली बिल, पानी बिल या कोई अन्य किसी आवेदन के लिए आपको लाइन में लगना तो पड़ता ही है। अगर आप लोकतंत्र के इस पर्व पर एक दिन लाइन में लगकर अगर अपना वोट डाल देंगे तो इससे प्रदेश में अच्छी सरकार बनेगी।   
 

 Assembly Election 2018

बहाना 8 : वोट देने गई तो घर का काम कौन करेगा?

मैनेज करना होगा: घर पर कोई उत्सव होता है तो हम मैनेज करके चलते हैं। 7 दिसंबर को लोकतंत्र का पर्व है। आप दिनभर के काम को इस प्रकार मैनेज करें कि वोट डालने के लिए भी समय मिले। आप मन से प्रयास करेंगी तो  समय जरूर मिल जाएगा।

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बहाना 9 : मुझे तो छुट्टी नहीं मिली, काम पर जाना है?

जल्दी उठ जाएं: अगर आपको काम पर जाना है तो सुबह जल्दी उठे और मन में ठान लंे कि मैं अपने बूथ पर सबसे पहले वोट डालूं। अगर ऐसा नहीं कर पाए तो दिन में समय निकाल कर या अपने कार्यस्थल से जल्दी आकर वोट डाल सकते हैं। 

 Assembly Election 2018

बहाना 10 : दिन में कभी भी वोट डाल देंगे। इसके लिए तनाव लेने की क्या जरूरत है

आलस से नुकसान: बिजली बिल, पानी बिल या कोई अन्य किसी आवेदन के लिए आपको लाइन में लगना तो पड़ता ही है। अगर आप लोकतंत्र के इस पर्व पर एक दिन लाइन में लगकर अगर अपना वोट डाल देंगे तो इससे प्रदेश में अच्छी सरकार बनेगी।

Assembly Election 2018

मुंशी प्रेमचंद की कहानी से यूं समझें अपनी अहमियत

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंचपरमेश्वर’ तो आपको याद ही होगी… दो दोस्तों अलगू चौधरी और जुम्मन शेख की कहानी थी। दोनों अच्छे दोस्त थे। सुख-दुख…जीना-मरना..हर पल साथ-साथ। गांव के लोग उनकी दोस्ती की मिसाल देते थे। फिर खाला(मौसी) से हुए विवाद में सरपंच अलगू चौधरी ने जब जुम्मन शेख के खिलाफ फैसला सुनाया तो उनकी दोस्ती में दरार पड़ गई। आखिरकार एक समय आया जब बैलों की खरीदारी को लेकर हुए अलगू के विवाद की सुनवाई में जुम्मन को पंच बनाया गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि न्याय की गद्दी पर बैठने वाला परमेश्वर होता है…सिर्फ पंच परमेश्वर…और जुम्मन ने बिना किसी राग-द्वेष के फैसला सुनाया।

यह कहानी आज क्यों प्रासंगिक…क्योंकि आज 7 दिसंबर है। लोकतंत्र का महापर्व। आज आप ही ‘पंचपरमेश्वर’ हैं और निर्णायक की भूमिका में हैं। आपके ही वोट से राजस्थान के अगले पांच साल का भविष्य तय होगा। मतदान के दौरान आपका न कोई दुश्मन होना चाहिए…न ही दोस्त। आपके जेहन में सिर्फ राजस्थान का उजला भविष्य होना चाहिए। इसलिए घर से निकलिए और वोट दीजिए। आपका एक-एक वोट प्रदेश के भविष्य के निर्माण में ईंट का काम करेगा।

निर्वाचन आयोग के नियमों की उड़ाई धज्जियां

अनूपगढ(श्रीगंगानगर)

निर्वाचन आयोग के नियमों की उड़ाई धज्जियां
मतदान के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने की मनमानी,
मीडिया कर्मियों को नही जाने दिया मतदान कैम्पस के अंदर,
निर्वाचन आयोग के प्राधिकार पत्र को किया अनदेखा,
भाग संख्या 27 पर मतदाताओ को भी रोके रखा मतदान कैम्पस के बाहर,
भाग संख्या 47 पर पोलिंग पार्टी की लापरवाही भी आई सामने,
अनेक मतदाताओ को मताधिकार से रखा वंचित,
पूर्व में मतदान होना बताकर रखा मताधिकार से वंचित,
राजनीति पार्टी विशेष द्वारा पोलिंग पार्टी को करवाया गया चाय,नास्ता,
भाग संख्या 41 पर पोलिंग पार्टी बेखोफ होकर कर रही थी चाय नास्ता,

अनूपगढ(श्रीगंगानगर)

श्रीगंगानगर के अनूपगढ में निर्वाचन आयोग के सख्त निर्देशो के बाद भी भाग संख्या 47 पर पोलिंग पार्टी की लापरवाही सामने आई।पोलिंग पार्टी की लापरवाही के चलते अनेक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित रह रहे।नव मतदाता राहुल सेठी ने बताया कि वह उत्साह पूर्वक मत करने पहुंचा तो उसे यह कहकर लोटा दिया गया।कि आपका पूर्व में किसी अन्य मतदाता द्वारा भुगतया जा चुका है।मंजू व विरो बाई को भी यही कहकर लोटा दिया गया।परेशान मतदाता इधर,उधर भटकते रहे।भाग संख्या 27 पर सुरक्षा कर्मियों ने मनमानी करते हुए मतदाताओ को मतदान कैम्पस के बाहर ही रोके रखा।मतदाताओ ने मीडिया कर्मियों को अवगत करवाया तो सुरक्षा कर्मियों ने मीडिया कर्मियों को भी मतदान कैम्पस के अंदर जाने से रोक दिया।मीडिया कर्मियों ने निर्वाचन आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्र दिखाया तो सुरक्षा कर्मियों ने उसे भी अनदेखा कर दिया।भाग संख्या 45 पर सुरक्षा कर्मियों ने मीडिया कर्मियों को अंदर जाने से रोक दिया।मीडिया कर्मियों द्वारा निर्वाचन अधिकारी मनमोहन मीणा व DSP सोहनराम विश्नोई से फोन पर बात करवाई गई।लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने अपनी हटधर्मिता नही छोड़ी।पुरानी पंचायत समिति भाग संख्या 41 पर राजनीति पार्टी विशेष द्वारा पोलिंग पार्टी को चाय नास्ता करवाया जा रहा था।पोलिंग पार्टी भी बेखोफ होकर चाय नास्ता कर रहे थे।बाहर मतदाता खड़े परेशान हो रहे थे।मोके पर मीडिया कर्मी पहुंच गए तो मीडिया कर्मियों को देखकर पीठासीन अधिकारी विजय सिंह चौधरी तिलमिला गए।मामले से निर्वाचन अधिकारी मनमोहन मीना DSP सोहन विश्नोई ASP भरतराज व पुलिस अधीक्षक योगेश यादव को अवगत करवाया गया है।अब देखना होगा कि निर्वाचन आयोग के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

बाईट-राजू डाल समाज सेवी
बाईट-राहुल सेठी नवमतदाता
बाईट-मंजू मतदाता

विजुल-6

मलकीत सिंह a1tv अनूपगढ

क्या राइट टू रिजेक्ट नहीं मिले तो ये तरीका अपनाये पब्लिक

अनूपगढ(श्रीगंगानगर)

विधानसभा क्षेत्र के गांव 18 H में मतदान का बहिष्कार,
महिलाओ सहित सेंकडो मतदाताओ ने किया बहिष्कार,
देर शाम तक मतदान बूथ पर बैठे रहे मतदाता,
पोंग डेम की समस्या के चलते किया बहिष्कार,
तहसीलदार दानाराम ने मतदाताओ से की समझाइस,

मलकीत सिंह A1 TV अनूपगढ

नोहर के गांव जसाना ने रचा इतिहास
0% हुई वोटिंग।

ज्ञात रहे की नोहर विधानसभा क्षेत्र के फेफाना के बाद दुसरे सबसे बड़े गांव जसाना ने चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया था।।
आपको बता दे कि आज से 14 महीने पहले इस गांव मे पवन व्यास की निर्मम हत्या कर दी गई थी।।उसी को लेकर ग्रामीणो मे भारी रोष था। उसी विरोध के चलते ग्रामीणों ने वोटिंग नही की।

विधानसभा क्षेत्र के गांव 23 म डी  में मतदान का बहिष्कार,
महिलाओ सहित सेंकडो मतदाताओ ने किया बहिष्कार,
देर शाम तक मतदान बूथ पर बैठे रहे मतदाता,
पोंग डेम की समस्या के चलते किया बहिष्कार,
तहसीलदार दानाराम ने मतदाताओ से की समझाइस,

क्या मतदाता को मुर्ख बनने जैसे कर्य के लिए चुनाव आयोग करेगा कारवाही

क्या मतदाता को मुर्ख बनने जैसे कर्य के लिए चुनाव आयोग करेगा कारवाही  राजस्थान में मतदान की दिन निकाली प्रलोभन देने की प्रति चुनाव आयोग कॉग्रेस पार्टी को करेगा बर्खास्त या नियम केवल आम पब्लिक के लिए ही है 

Repoll likely in future if NOTA gets most votes

Parasuram, chairman of the 27th state election commissioners’ conference and Commissioner of the State Election Commission (SEC) of Madhya Pradesh, said Information Technology (IT) will be widely adopted for elections in future and issues like online voting and online filing of nomination papers by candidates would be discussed.

Delivering the inaugural speech of the conference at Lalitha Mahal Palace Hotel here on Tuesday, he said online voting had already been experimented with in the local bodies election in Gujarat, while online nominations had been received well in the local bodies polls in Madhya Pradesh and Maharashtra.

Out of the total 30 commissioners of SECs, 19 are taking part. Besides, chairman of Electronics Corporation of India Rear Admiral Sanjay Chaubey, director of Bharat Electronics Limited (BEL) Vinay Kumar Katyal, general manager of BEL G M Senapathi, deputy secretary of SEC of Madhya Pradesh Deepak Saxena, vice president of IL&FS Pankaj Gupta and managing director of Mysuru-based Mysuru Paints and Varnish Limited Chandrasekhar Doddamani are attending.

Parasuram said, in Maharashtra and Haryana, none of the above (NOTA) on the ballot papers had already been treated as a virtual candidate in the local bodies election.

“It is a step towards empowering the people to reject unworthy candidates. In future, if NOTA gets the highest number of votes, it may pave the way for re-election” he said.

He said, even though the Election Commission was a three-member body, it should be considered as a 30-plus-member body as the commissioners of the SECs also play a major role in formulating policies.

न भाजपा न कांग्रेस, वोट सिर्फ नोटा को

सरकारों पर लगाया अर्धसैनिक बलों से सौतेले व्यवहार का आरोप एस, झज्जर : अर्ध सैनिक बलों के सेवानिवृत्त जवानों ने शुक्रवार को सरकार के खिलाफ झज्जर में प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि वे इस बार चुनाव में नोटा दबाएंगे। प्रदर्शन के बाद पूर्व सैनिकों ने डीसी को पीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे असोसिएशन के सचिव रणबीर सिंह ने कहा कि कांग्रेस सांपनाथ और भाजपा नागनाथ है। इसलिए अर्ध सैनिक बल अपना वोट नोटानाथ को देंगे। उन्होंने कहा कि सभी सरकारों ने उनके साथ सौतेला व्यवहार किया है। उन्हें शहीद का दर्जा तक नहीं दिया जाता है। उनकी मांग है कि अर्धसैनिक बलों के जो जवान देशसेवा करते-करते मर गए उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए। साथ ही उनकी याद में शहीद स्मारक बनाया जाए। उन्होंने बताया कि देश में अर्ध सैनिक बलों के जवानों की संख्या करीब 20 लाख है, जिनमें से 12 लाख कार्यरत हैं और 8 लाख रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2004 के बाद से उनकी पेंशन सेवा भी बंद कर दी गई है, जबकि सेना को पेंशन दी जा रही है।

प्रत्याशियों/ नेताओ को सुधारे सकता है नोटा

विधानसभा चुनाव में नोटा ऑप्शन आने के बाद प्रत्याशियों के लिए खतरनाक साबित होने का भय बना हुआ है। बीते चुनाव में करीब १० हजार से अधिक नोटा का उपयोग होने के बाद अब लोगों के लिए भले ही नया ऑप्शन हो, लेकिन प्रत्याशियों के लिए किसी खतरे से खाली नहीं है।
जिले पर नजर डालें तो वर्ष २०१३ में पहली बार नोटा आने पर पथरिया विधानसभा में २५१४ लोगों ने नोटा को पसंद किया था। इसी तरह से दमोह विधानसभा में १७५८ ने प्रत्याशी पसंद नहीं आने पर नोटा का बटन दबाया था। इसी तरह से जबेरा विधानसभा में सबसे अधिक ३०२१ मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर प्रत्याशियों को नापसंद किया था। हटा विधानसभा में भी २९२८ लोगों ने नोटा का बटन दबाकर अपने मन का प्रत्याशी नहीं होने का उदाहरण प्रस्तुत किया था।
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किस विधानसभा में क्या रही थी स्थिति-
विधानसभा कुल मतदाता डाले गए मत सर्वाधिक निकटतम अंतर
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पथरिया- १९७६४२ १४०६७३ लखन- बीजेपी-६००८३ पुष्पेंद्र-कांग्रेस-५२७६८ ७०३१५
दमोह- २१२५७१ १५१५४६ जयंत-बीजेपी-७२५३४ चंद्रभान–कांग्रेस-६७५८१ ४९५३
जबेरा- १९८९९९ १४६८६६ प्रताप-कांग्रेस-६८५११ दशरथ-बीजेपी-५६६१५ ११८९६
हटा २०१५०८ १२७४४३ उमादेवी-बीजेपी-५९२३१ हरिशंकर-कांग्रेस-५६३७९ २८५२
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अगर जिले के चारों विधानसभाओं पर नजर डाली जाए तो निश्चित ही विधानसभाओं में अपना भाग्य आजमा रहे प्रत्याशियों को न पसंद करने वालों की संख्या १० हजार २२१ रही थी। जिसमें सबसे अधिक जबेरा में ३०२१ लोगों ने प्रत्याशियों की जगह नोटा पसंद किया था। उससे कम हटा, पथरिया फिर दमोह रहा था। इसमें खास बात यह देखने आई कि हटा में भाजपा प्रत्याशी महज २८५२ मतों से विजयी रहीं थीं। जबकि यहां पर उससे अधिक २९२८ नोटा का बटन दबा था। अर्थात यदि नोटा की जगह यही वोट कांग्रेस प्रत्याशी को चली जाती तो पांसा पलटते देर नहीं लगती।
एट्रोसिटी एक्ट के बाद गूंजा नोटा-
पिछले दिनों जब लोकसभा व राज्यसभा के बाद एट्रोसिटी एक्ट कानून लागू हुआ तो एक वर्ग विशेष के लोगों ने नोटा को पसंद करने सोशल मीडिया पर जमकर प्रचार किया था। उसके बाद फिर अलग-अलग पार्टियों का गठन भी किया जाने लगा। और फिर उन्हीें में से कुछ लोग चुनावी समर में कूद पड़े। जिसके बाद नोटा का प्रचार करने वाले वही लोग अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करने लगे। लेकिन फिर भी लगभग प्रत्येक उम्मीदवार को नोटा का खतरा अभी भी बना हुआ है। जिसमें प्रत्याशी हर वर्ग को मनाने के लिए कमर कसता नजर आ रहा है।

-विधानसभा हार-जीत का अंतर- -नोटा
-पथरिया ७३१५ २५१४
-दमोह ४९५३ १७५८
-जबेरा ११८९६ ३०२१
-हटा २८५२ २९२८
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राजस्व रिकॉर्ड से गायब हुआ ये गांव, लोगों ने नोटा दबाने का किया फैसला

छत्तीसगढ़ के जशपुर में सरकारी अमले की लापरवाही से परेशान होकर ग्रामीणों ने इस बार विधानसभा चुनाव में नोटा का बटन दबाने का निर्णय लिया है. दरअसल इस गांव में शासन का भुईयां कार्यक्रम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है. इस योजना के तहत जमीन के सारे सरकारी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण तो किया गया है, लेकिन सर्वर से जशपुर का कलारू गांव राजस्व रिकॉर्ड से ही गायब हो गया है, जिससे ग्रामीणों को गांव का नक्शा, खसरा और बी-वन जैसे जमीनी दस्तावेज ऑन लाइन प्राप्त नहीं हो रहे हैं. साथ ही ग्रामीण सारी शासकीय योजनाओं से भी वंचित हो रहे हैं इस गांव में आश्रित बस्ती कलारू, माझा कलारू मिलाकर लगभग डेढ़ सौ परिवार रहते हैं. इनमें से कुछ परिवार भूमिहीन भी हैं, लेकिन भूस्वामी और भूमिहीन दोनों परिवारों की मुसीबत एक ही है गांव का राजस्व रिकॉर्ड से गायब होना, जिससे यहां के लोगों को कृषि और उद्यानिकी से संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए ग्रामीण दो बार कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक अधिकारी उनकी समस्‍‍‍‍या का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनका राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होगा, तब तक वे चुनाव प्रचार के लिए किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को अपने गांव में घुसने नहीं देंगे और नोटा का बटन दबाएंगे.

Election 2018: पांच साल पहले बेअसर हुआ नोटा बिगाड़ सकता ‘खेल’

पांच साल पहले नर्मदापुरम संभाग में बेअसर रहा नोटा इस बार कई प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ सकता है। वजह साफ है। बिना लहर के हो रहे इस चुनाव में अधिकांश जगह कांटे का मुकाबला है या फिर त्रिकोणीय संघर्ष। ऐसे में नाराज वोटर ने नोटा की बटन दबाई तो उम्मीदवारों का गणित गड़बड़ा सकता है। हालांकि इस बार नोटा की तरह ही नाराज मतदाताओं के लिए सपाक्स भी विकल्प बनकर सामने आया है। पिछले चुनाव में नोटा को साढ़े तीन हजार से लेकर करीब आठ हजार मत तक नोटा को मिले थे। हरदा विधानसभा सीट में तो नोटा को जीत-हार के अंतर से सिर्फ 660 वोट ही कम मिले थे। संभाग में ४७३९३ लोगों ने नोटा पर मतदान किया था। चुनाव के जानकार मानते हैं कि वर्ष 2013 में लहर के कारण एक जीत का अंतर बढ़ा था। लेकिन इस बार अधिकांश जगह मुकाबला कांटे का है। संभाग की सभी 11 सीटों पर पहले की तरह जीत-हार का भारी अंतर भी नहीं होने की संभावना है। ऐसे में नोटा यदि पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा वोट हासिल कर गया तो कई उम्मीदवारों की रणनीति फेल हो सकती है।  

कहां कितना था जीत का अंतर
होशंगाबाद – 49296
सोहागपुर – 28891
सिवनी मालवा – 12547
पिपरिया – 51157
हरदा – 4651
टिमरनी – 16507
बैतूल – 24347
मुलताई – 31869
सारनी – 39602
भैंसदेही – 13276
घोड़ाडोंगरी – 8084
होशंगाबाद में बेदम रहा था नोटा
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में होशंगाबाद जिले में नोटा बेदम साबित हुआ था। उसे जिले में 14039 मत मिले थे। इनमें सर्वाधिक मत 4219 पिपरिया विधानसभा क्षेत्र में मिल पाए थे। सिवनीमालवा में ३७२७, सोहागपुर में ३२५६ और होशंगाबाद में २८३७ लोगों ने नोटा पर मोहर लगाई थी। जबकि यहां जीत का अंतर काफी था।

हरदा में हार-जीत के अंतर के करीब
हरदा और टिमरनी विधानसभा में पिछली बार ७,३१३ मत नोटा को मिले थे। इनमें सर्वाधिक हरदा में ३९९१ और टिमरनी में ३३२६ मत नोटा को हासिल हुए थे। हरदा में जीत का अंतर ही 4651 था। जिससे नोटा को 660 मत कम मिले थे।

बैतूल: भैंसदेही में मिले थे सर्वाधिक मतबैतूल जिले की पांच विधानसभा सीटों में वर्ष २०१३ के चुनावों में सबसे अधिक नोटा को वोट भैंसदेही विधानसभा सीट पर मिले थे। यहां 7929 लोगों ने नोटा को अपना वोट दिया था। इसके बाद घोड़ाडोंगरी में 5926, अमला में 5465, बैतूल में 3800 और मुलताई में 2९२१ लोगों ने नोटा को अपना मत दिया था। पूरे जिले में 26041 मत नोटा को मिले थे। मुलताई में ७७.११ प्रतिशत मतदान हुआ था।
सपाक्स भी बनेगी सिरदर्द
अभी नाराज वोटर नोटा की बटन दबाता था। लेकिन इस बार सपाक्स भी नाराज मतदाता का वोट हासिल करेगा। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर एक वर्ग के मतदाता नाराज हैं। इसी वर्ग की अगुवाई करने वाले संगठन सपाक्स ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
नोटा से निपटने यूथ पर नजर
संभाग की सभी विधानसभाओं में नोटा से निपटने के लिए भाजपा और कांग्रेस की युवाओं पर नजर है। माना जाता है कि खासकर यही वर्ग नोटा की बटन दबाता है। इसलिए सभी दल नाराज मतदाताओं को अपने पाले में लाने के जतन में जुटे हुए हैं।