Election 2018: पांच साल पहले बेअसर हुआ नोटा बिगाड़ सकता ‘खेल’

पांच साल पहले नर्मदापुरम संभाग में बेअसर रहा नोटा इस बार कई प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ सकता है। वजह साफ है। बिना लहर के हो रहे इस चुनाव में अधिकांश जगह कांटे का मुकाबला है या फिर त्रिकोणीय संघर्ष। ऐसे में नाराज वोटर ने नोटा की बटन दबाई तो उम्मीदवारों का गणित गड़बड़ा सकता है। हालांकि इस बार नोटा की तरह ही नाराज मतदाताओं के लिए सपाक्स भी विकल्प बनकर सामने आया है। पिछले चुनाव में नोटा को साढ़े तीन हजार से लेकर करीब आठ हजार मत तक नोटा को मिले थे। हरदा विधानसभा सीट में तो नोटा को जीत-हार के अंतर से सिर्फ 660 वोट ही कम मिले थे। संभाग में ४७३९३ लोगों ने नोटा पर मतदान किया था। चुनाव के जानकार मानते हैं कि वर्ष 2013 में लहर के कारण एक जीत का अंतर बढ़ा था। लेकिन इस बार अधिकांश जगह मुकाबला कांटे का है। संभाग की सभी 11 सीटों पर पहले की तरह जीत-हार का भारी अंतर भी नहीं होने की संभावना है। ऐसे में नोटा यदि पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा वोट हासिल कर गया तो कई उम्मीदवारों की रणनीति फेल हो सकती है।  

कहां कितना था जीत का अंतर
होशंगाबाद – 49296
सोहागपुर – 28891
सिवनी मालवा – 12547
पिपरिया – 51157
हरदा – 4651
टिमरनी – 16507
बैतूल – 24347
मुलताई – 31869
सारनी – 39602
भैंसदेही – 13276
घोड़ाडोंगरी – 8084
होशंगाबाद में बेदम रहा था नोटा
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में होशंगाबाद जिले में नोटा बेदम साबित हुआ था। उसे जिले में 14039 मत मिले थे। इनमें सर्वाधिक मत 4219 पिपरिया विधानसभा क्षेत्र में मिल पाए थे। सिवनीमालवा में ३७२७, सोहागपुर में ३२५६ और होशंगाबाद में २८३७ लोगों ने नोटा पर मोहर लगाई थी। जबकि यहां जीत का अंतर काफी था।

हरदा में हार-जीत के अंतर के करीब
हरदा और टिमरनी विधानसभा में पिछली बार ७,३१३ मत नोटा को मिले थे। इनमें सर्वाधिक हरदा में ३९९१ और टिमरनी में ३३२६ मत नोटा को हासिल हुए थे। हरदा में जीत का अंतर ही 4651 था। जिससे नोटा को 660 मत कम मिले थे।

बैतूल: भैंसदेही में मिले थे सर्वाधिक मतबैतूल जिले की पांच विधानसभा सीटों में वर्ष २०१३ के चुनावों में सबसे अधिक नोटा को वोट भैंसदेही विधानसभा सीट पर मिले थे। यहां 7929 लोगों ने नोटा को अपना वोट दिया था। इसके बाद घोड़ाडोंगरी में 5926, अमला में 5465, बैतूल में 3800 और मुलताई में 2९२१ लोगों ने नोटा को अपना मत दिया था। पूरे जिले में 26041 मत नोटा को मिले थे। मुलताई में ७७.११ प्रतिशत मतदान हुआ था।
सपाक्स भी बनेगी सिरदर्द
अभी नाराज वोटर नोटा की बटन दबाता था। लेकिन इस बार सपाक्स भी नाराज मतदाता का वोट हासिल करेगा। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर एक वर्ग के मतदाता नाराज हैं। इसी वर्ग की अगुवाई करने वाले संगठन सपाक्स ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
नोटा से निपटने यूथ पर नजर
संभाग की सभी विधानसभाओं में नोटा से निपटने के लिए भाजपा और कांग्रेस की युवाओं पर नजर है। माना जाता है कि खासकर यही वर्ग नोटा की बटन दबाता है। इसलिए सभी दल नाराज मतदाताओं को अपने पाले में लाने के जतन में जुटे हुए हैं।

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