41 हजार मतदाताओं को नहीं भाया कोई नेता #VOTE for #NOTA

शेखावाटी क्षेत्र के तीनों जिले सीकर, चूरू व झुंझुनूं में भले ही प्रचार-प्रसार में राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंकने में कामयाब हो रहे है, लेकिन नेता मतदाताओं का पूरी तरह दिल जीतने में सफल नहीं हो पा रहे है।


सीकर. शेखावाटी क्षेत्र के तीनों जिले सीकर, चूरू व झुंझुनूं में भले ही प्रचार-प्रसार में राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंकने में कामयाब हो रहे है, लेकिन नेता मतदाताओं का पूरी तरह दिल जीतने में सफल नहीं हो पा रहे है। तीनों जिलों में पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नजर डाले तो कहानी कुछ ऐसी ही नजर आ रही हैं। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में तीन जिलो के 21 विधानसभा क्षेत्रों में 41 हजार 72 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। चौकाने वाली बात यह है कि तीनों जिलों के मतदाताओं के नोटा प्रयोग का योग किया जाए तो कई ऐसे प्रत्याशी सामने आए है जिनका जीत का अंतर भी नोटा से कम रहा है। पिछली बार मोदी लहर के बीच भी मतदाता ने नोटा का सर्वाधिक प्रयोग किया था। ऐसे में इस बार विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी यह प्रतिशत कम करवा पाऐंगे या नहीं। विधानसभा चुनाव 2013 में शुरू किये नोटा के प्रयोग की सबसे रोचक बात दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में रही। यहा प्रत्याशी के बीच हार व जीत का अंतर 575 मत रहा तो नोटा का प्रयोग 1999 मतदाताओं ने किया। इसी तरह फतेहपुर में भी जीत व हार का अंतर 3926 रहा तो यहां भी नोटा का प्रयोग 1747 मतदाताओं ने किया।

सबसे ज्यादा सीकर में प्रयोग
शेखावाटी क्षेत्र में सर्वाधिक नोटा का प्रयोग के सीकर जिले की आठ विधानसभा में हुआ हैं। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में सीकर की आठों विधानसभा में 15028 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया तो चूरू की छह विधानसभा में 14928 व झुंझुनूं की सात विधानसभा क्षेत्रों में 11116 मतदाताओं ने नोटा प्रयोग किया है।

सबसे कम यहां

विधानसभा चुनाव 2013 में शेखावाटी क्षेत्र में सुजानगढ़ विधानसभा में 4554 मतदाताओं ने सर्वाधिक नोटा का प्रयोग किया है। इसके अलावा नीमकाथाना विधानसभा में भी 3193 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया हैं। सबसे कम नोटा का प्रयोग उदयपुरवाटी में 712 मतदाताओं ने किया हैं।

यह है नोटा
प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2013 से नोटा के प्रयोग की शुरूआत हुई। नोटा का प्रयोग मतदाता किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी को पंसद नहीं करने पर कर सकते हैं। ऐसे में मतगणना के समय नोटा के प्रयोग करने वाले लोगों की अलग से गिनती की जाती हैं। नोटा वोट जीत व हार किसी भी पक्ष में शामिल नहीं माने जाते हैं।

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