लोकतंत्र या वोटतंत्र ?

हमारे भारत में लोकतंत्र चुनाव को नेताओं ने अपने स्वार्थ व् झूठे वादों से देश की जनता को सिर्फ वोटो के लिए इस्तेमाल करते हैं और बाद में भ्रस्टाचार की डोर पकड़ कर जनता के पैसों से अपनी पूरी जिन्दगी एसो – आराम के लिये धन इकठा करने के काम में लग जाते हैं, और बाद में देश की जनता को धर्म या आरक्षण के नाम से बाँट दिया जाता हैं, और जनता को गुमराह करने का काम देश की हर सरकार ने किया हैं, और यह सिद्ध कर दिया हैं की लोकतंत्र की पार्टिया जनता को वोटतंत्र के नाम से परिभाषित करने का काम किया हैं, या इसे यूज एंड थ्रो भी कह सकते हैं, क्योंकी बाद में जनता के दुःख दर्द को सुनने का इनके पास टाइम ही नही होता हैं, चुनाव जीत जाने के बाद जनता के जनप्रतिनिधि जनता को भूल जाते हैं, और अपनी निजी ज़िन्दगी में व्यस्त हो जाते हैं, और फिर पांच साल बाद लोकतंत्र त्यौहार के देवता फिर से अपने इलाके या देश की समस्याओ का मुद्दा बनाकर अपने रंग बिखेरने का कार्य करते हैं,
             इन लोकतंत्र के देवताओं को सबक सिखाना हैं,
             अबकी बार “ नोटा “ का बटन दबाना हैं ,,

Leave a Reply