राष्ट्र में अन्याय

सांचौर की महिला पुलिस सिपाही गीता बिश्नोई ने पुलिस विभाग के अधिकारियों की ज्यादती के आगे थककर अपनी जान दे दी। आधी आबादी के प्रति अमर्यादित सोच उनके जीवन निर्वाह हेतु सरकारी सेवाओं में भागीदारी, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी आगे बढ़ाओ जैसी भावनाओं व देश के विकास में आधी आबादी के पूरे सहयोग लेने के प्रति प्रश्नचिन्ह ही लगा दिया है ?? यह घटना अतिनिंदनीय, अतिचिन्तनीय व अति गंभीर है , बहन गीता के परिवार को न्याय दिलवाने के साथ साथ हमे यह विश्वास दिलाना होगा कि ऐसी घटनाएं दुबारा न हो । मेरी सभी बहनों से भी निवेदन रहेगा कि आप इतनी शसक्त बने जो किसी की हिम्मत नही हो कि कोई आपको इस अंजाम तक पहुंचाए और आपको सुसाइड करने पर मजबूर होना पड़े। अगर समय रहते गीता की पुकार सुन ली जाती तो आज उसकी जान बच सकती थी पर विभाग, परिवार व संबंधियों ने हल्के में ले लिया और गीता को इस दुनिया से अलविदा कहना पड़ा । भविष्य में ऐसी घटना नही हो , यह हम सबको सुनिश्चित करना होगा हमे आधी आबादी को जीने के लिए पूरा हक देना होगा । आज देश के विकास में सहभागी बनकर महिलाएं हर विभाग , हर सेवा में बढ़चढ़ कर अच्छी सेवाए दे रही है फिर ऐसी घटनाएं क्यों घटित होती है?? हम आशा करते है हमारे पुरुष प्रधान समाज के भाइयों से कि एक सभ्य समाज व सभ्य देश के अच्छे नागरिक बनकर बहन बेटियों की इज्जत करें व उन्हें भी आगे बढ़ने व जीने का उचित अवसर प्रदान करें।
शत शत नमन ! गीता बिश्नोई

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