राजस्व रिकॉर्ड से गायब हुआ ये गांव, लोगों ने नोटा दबाने का किया फैसला

छत्तीसगढ़ के जशपुर में सरकारी अमले की लापरवाही से परेशान होकर ग्रामीणों ने इस बार विधानसभा चुनाव में नोटा का बटन दबाने का निर्णय लिया है. दरअसल इस गांव में शासन का भुईयां कार्यक्रम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है. इस योजना के तहत जमीन के सारे सरकारी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण तो किया गया है, लेकिन सर्वर से जशपुर का कलारू गांव राजस्व रिकॉर्ड से ही गायब हो गया है, जिससे ग्रामीणों को गांव का नक्शा, खसरा और बी-वन जैसे जमीनी दस्तावेज ऑन लाइन प्राप्त नहीं हो रहे हैं. साथ ही ग्रामीण सारी शासकीय योजनाओं से भी वंचित हो रहे हैं इस गांव में आश्रित बस्ती कलारू, माझा कलारू मिलाकर लगभग डेढ़ सौ परिवार रहते हैं. इनमें से कुछ परिवार भूमिहीन भी हैं, लेकिन भूस्वामी और भूमिहीन दोनों परिवारों की मुसीबत एक ही है गांव का राजस्व रिकॉर्ड से गायब होना, जिससे यहां के लोगों को कृषि और उद्यानिकी से संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए ग्रामीण दो बार कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक अधिकारी उनकी समस्‍‍‍‍या का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनका राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होगा, तब तक वे चुनाव प्रचार के लिए किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को अपने गांव में घुसने नहीं देंगे और नोटा का बटन दबाएंगे.

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