प्रत्याशी पसंद नहीं आया तो नोटा के अलावा चुनाव आयोग दे रहा आपको दूसरी बड़ी सुविधा, क्या यहां पढि़ए

हेमंत कपूर @दुर्ग. चुनाव में प्रत्याशी पसंद का न हो तो मतदाता मतदान से इनकार भी कर सकेंगे। यह सुविधा इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन पर मतदान के लिए कोई भी बटन दबाने से पूर्व तक मिलेेगी। ऐसा होने पर बाकायदा चुनाव अधिकारी द्वारा मतदान रजिस्टर के रिमार्क वाले कॉलम पर मतदान से इनकार दर्ज किया जाएगा।

काफी महत्वपूर्ण निर्णय
देशभर में राइट टू रिजेक्ट अर्थात चुनावों में खड़े किसी भी उम्मीदवार को मतदान न कर रिजेक्ट किए जाने के ऑप्शन की मांग उठती रही है। चुनाव में पारदर्शिता व राजनीति दलों द्वारा जनता की पसंद को दरकिनार कर खराब छवि वाले लोगों को चुनाव मैदान में उतारने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन यह चुनाव प्रक्रिया में किसी नियम के रूप में दर्ज नहीं हो पाया है, लेकिन मतदान से इनकार का ऑप्शन इसी तर्ज पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस ऑप्शन से चुनने योग्य, पसंद का उम्मीद्वार नहीं हुआ तो राइट-टू-रिजेक्ट की तर्ज पर मतदान से इनकार किया जा सकेगा। इवीएम में ऐसी स्थिति के लिए नोटा का ऑप्शन है। बड़ी संख्या में मतदाता इसका इस्तेमाल भी करते हंै, लेकिन नोटा के इस्तेमाल से कोई भी रिमॉर्क दर्ज नहीं होता। इसके अलावा मतदान से इनकार का कारण पता नहीं चल पाता, लेकिन इनकार के ऑप्शन से रजिस्टर में मतदान से इनकार दर्ज किया जाएगा। मतदाता चाहे तो इनकार का कारण भी दर्ज करा सकेगा। शामिल होना पड़ेगा मतदान प्रक्रिया में
चुनाव के दौरान मतदाता रजिस्टर में मतदान से इनकार दर्ज कराने के लिए मतदाताओं को मतदान करने वालों की तरह सभी प्रक्रिया से गुजरना होगा। मतदाता पर्ची के अनुसार नाम का मिलान, मतदाता की पहचान व मतदान से पहले ऊंगली पर नीली स्याही लगाए जाने के बाद मतदान के लिए अनुमति देने वाले चुनाव अधिकारी से समक्ष इनकार की जानकारी दर्ज करानी होगी। जानकारी नहीं इसलिए इस्तेमाल कम
एक बार मतदान प्रक्रिया में शामिल होने के बाद किसी भी उम्मीद्वार के पक्ष में मतदान से इनकार भी किया जा सकता है, इसका अब तक अधिकतर मतदाताओं को जानकारी नहीं है। इसके चलते अब तक इस ऑप्शन का उपयोग बेहद कम होता रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा इस ऑप्शन का चयन करने वाले लोगों की संख्या की अधिकृत तौर पर गणना अथवा घोषणा भी नहीं की जाती। उप जिला निर्वाचन अधिकारी बीबी पंचभाई ने बताया कि मतदान के इनकार का ऑप्शन है। मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसी मतदाता को लगता है कि प्रत्याशी उनके पसंद का नहीं है और वह नोटा का इस्तेमाल नहीं करना चाहता तो वह इस ऑप्शन का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन नोटा के ऑप्शन के बाद ऐसे मतदाताओं की संख्या बेहद कम हो गई है। अधिकारियों को दी जा रही जानकारी
विधानसभा चुनाव के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें इस ऑप्शन की जानकारी दी जा रही है। निर्वाचन से जुड़े अफसरों ने बताया कि ऐसी स्थिति में पीठासीन अधिकारी द्वारा मतदाता रजिस्टर 17 (क) में इसे मतदान से इंकार के रूप में दर्ज किया जाएगा।

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