देश की राजनीति और भ्रष्टाचार

भारत की आजादी के पूर्व अंग्रेजो ने सुविधाए प्राप्त करने के लिए भारत के सम्पन लोगो को सुविधास्वरूप धन देना प्रारंभ किया ! राजे – रजवाड़े और साहूकारो को धन देकर उनसे वे सब प्राप्त कर लेते थे जो उन्हें चाहिए था ! अंग्रेज भारत के रईसों को धन देकर अपने ही देश के साथ गद्दारी करने के लिए कहा करते और देश के धनी व्यक्ति ऐसा ही करते थे ! और भ्रष्टाचार की नीव वही से प्रारम्भ हुई और आज तक यह भारत देश में पूरी तरह से फल-फूल रही हैं , भारत की आजादी के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था राशनिग, लाइसेंस, परमिट लालफीताशाही में जकड़ी रही ! लाइसेंस-परमिट राज था, तब भी लाइसेंस या परमिट पाने के लिए व्यापारी और उद्योगपति घुस दिया करते थे, जेसे आज भी देते हैं , जिस भी सरकारी काम या योजना प्रारम्भ होती हैं तो उस काम का ठेका या टेंडर बड़े वर्ग को ही दिया जाता हैं, क्योकि उन बड़े वर्ग के उद्योगपतियों से पार्टी को चंदे के नाम से मोटी रकम मिलती हैं, उसके बाद देश को चलाने वाली पार्टी को सत्ता हासिल होती हैं, उसके बाद देश में वैश्वीकरण, निजीकरण, उदारीकरण,विदेशीकरण,बाजारीकरण एंव विनियम की नीतियों के माध्यम से देश में घोटालों की बाढ़ का काम किया हैं, ऐसे बड़े घोटालों के कारण आज के भारत में छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक की राजनीति और भ्रष्टाचार को एक ही नजरिये से देखे जाने लगा हैं ! आओ मिलकर देश बचाए , ‘’नोटा’’ की शक्ति दिखलाये,,

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