जातिवाद की राजनीति ?

लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार सभी को हैं लेकिन इस अधिकार का दुरूपयोग भी नही होना चाहिए, जनतंत्र में जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों और उनसे बनी सरकार से अपेक्षा की जाती हैं की बिना किसी भेदभाव के समग्र रूप से राष्ट्र के विकास का नियोजन करे , और सत्ता प्राप्ति का मुख्य उदेश्य भी राष्ट्र के निर्माण का होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में जातिवाद विचारधारा से प्रेरित राजनेता और उससे विकसित राजनितिक पार्टी केवल जातीय आन्दोलन खड़ा कर अपनी राजनितिक प्रष्ठभूमि तेयार करने में संग्लन हैं, पिछले सालो में देखने को आया की जातीय आन्दोलनों की एक श्रंखला चली जातीय आंदोलनों में गुर्जर आन्दोलन , जाट आन्दोलन, पाटीदार आन्दोलन, प्रमुख हैं, और इन आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य जातिवाद आरक्षण का रहा हैं, क्योकि राजनेताओ का सम्बन्ध जातीय संगठनो के गर्भ से होता हैं , इसलिए जाति को संगठित बनाये रखने के लिए समय-समय पर जातीय मुद्दे उठाना भी जरुरी होता हैं, भारत का उच्चतम न्यायलय एक ऐसी जगह हैं जंहा प्रत्येक समस्या का पूरा समाधान किया जाता हैं, लेकिन कई बार शीर्ष न्यायलय से अनुकूल फेसला न आने पर राजनितिक पार्टीया आन्दोलन पर उतारू होने पर भी नही चुकती, और इन आन्दोलन का मुख्य उदेश्य अपना वोट बैंक तेयार करना और विपक्ष को कमजोर दिखाना हैं, इन आन्दोलन से हो रहे देश को आर्थिक नुकशान से इन पार्टीधारियों को कोई फर्क नही पड़ता , आर्थिक नुकशान की भरपाई आम जनता को महगाई के तोर पर करनी पड़ती हैं, वर्तमान में देश की राजनितिक पार्टियों का जातिवाद यहा तक ही सिमित नही रह जाता हैं , चुनाव के समय पार्टी के प्रत्यासी को जातिवाद समीकरण का आधार व् क्षेत्र की समस्या को ध्यान में रख कर टिकट देना आम बात हैं , देश में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जंहा जातिवाद की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए उस क्षेत्र को जातिवाद प्रतिबंद क्षेत्र माना जाता हैं, और ऐसे क्षेत्रो में जब चुनाव प्रत्यासी चुनाव जीत कर सत्ता में आता हैं तो वंहा जातिवाद को बढ़ावा देना आम बात है और ऐसी जगह जातिवाद आन्दोलन पैदा होते हैं, कई बार ऐसा लगता हैं की अधिकतर मुद्दे राजनितिक आरक्षण या जातिवाद से सम्बधित हैं या फिर क्षेत्रवाद से सम्बधित हैं, ऐसी राजनितिक पार्टियों ने देश में भ्रष्टाचार और गरीबी को बढ़ावा देने का काम किया हैं! जातिवाद हटाना हैं , निर्वाचन को जगाना हैं, “नोटा” बटन दबाना हैं

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