चुनाव / आखिर क्या है ‘नोटा’? चुनाव आयोग ने बनाया और पावरफुल, नोटा जीता तो हारेंगे सब प्रत्याशी

पानीपत। हरियाणा में 16 दिसंबर को 5 नगर निगम में हो रहे चुनावों में हरियाणा निर्वाचन आयोग ने पहली बार एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए नोटा (नन ऑफ द अबव) को एक चुनाव प्रत्याशी की तरह मानने का निर्णय लिया है। इससे नोटा को और पावरफुल बना दिया है। इस चुनाव में यदि नोटा को अन्य चुनाव प्रत्याशियों से ज्यादा वोट मिल जाते हैं तो दोबारा चुनाव होंगे और उस चुनाव में पहले वाले प्रत्याशी अयोग्य समझे जाएंगे। ये पहला मौका है जब नोटा को इतना सशक्त है। आखिर क्या है ‘नोटा’? नोटा (नन ऑफ द अबव) मतदाता को यह अधिकार देता है कि वह किसी खास सीट से चुनाव लड़ रहे किसी भी उम्मीदवार के लिए मतदान नहीं करें। साल 2009 में चुनाव आयोग ने नोटा संबंधी विकल्प को उपलब्ध कराने की मंशा जाहिर की थी। इसी पर नागरिक अधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने भी नोटा के समर्थन में एक जनहित याचिका दायर की। 27 सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और चुनाव आयोग को ईवीएम में नन अॉफ अबव यानी नोटा का बटन उपलब्ध कराने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि नोटा का बटन देने से राजनीति दलों पर भी अच्छे चुनाव प्रत्याशी खड़े करना का दबाव रहेगा। कब सबसे पहले इस्तेमाल हुआ नोटा: नोटा का इस्तेमाल सबसे पहले 2013 में छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान, मध्यप्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के विधानसभा चुनाव में हुआ। इस चुनाव में 15 लाख लोगों ने नोटा का पहली बार इस्तेमाल किया। इसके बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भी नोटा का इस्तेमाल किया गया। 2015 तक देशभर के सभी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में नोटा का इस्तेमाल शुरू हो गया। किसने डिजाइन किया नोटा का चिन्ह: 18 सितंबर 2015 को भारतीय चुनाव आयोग ने आधिकारिक रुप से नोटा का चिन्ह घोषित किया। इस चिन्ह को अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन ने बनाया। चुनाव आयोग ने घोषित किया कि यह चिन्ह सभी चुनाव प्रत्याशियों के आखिर में होगा। किस-किस देश में इस्तेमाल होता है नोटा: नोटा का इस्तेमाल स्पेन, कोलंबिया, इंडोनेशिया, कनाडा, नार्वे, यूक्रेन, ब्राजील, बांग्लादेश, फिनलैंड, स्वीडन, चिली, फ्रांस, बेल्जियम में होता है। NOTAElection

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