आखिर गलती किसकी ?

अमृतसर में रावण दहन के कार्यक्रम को देखने के लिए जोड़ा फाटक के पास रेल ट्रेक पर खड़ी भीड़ को ट्रेन ने अपने चपेट में लेने से मरने वालो की संख्या 61 से ऊपर और 100 से ज्यादा घायल हो सकते हैं, और यह बहुत ही दुःख भरी घटना घटी ! आखिर गलती किसकी का सवाल दिल्लो दिमाग पर आ जाता है, आखिर कौन हैं इस घटना का जिम्मेवार क्या खुद वो लोग जो ट्रेक पर थे या सासन-प्रसासन या रेलवे या दशहरा कमेटी ! क्योकि हमारे देश में मनुष्य की मोत की अब कोई कीमत नहीं रही, कही तो सरे आम क़त्ल हो रहे हैं या सड़क हादसे होना आम बात हैं, इस रेल घटना की तरह हमारे देश में बहुत से ऐसे हादसे होते हैं, लेकिन आज तक ऐसा कोई सिस्टम या कानून नही बना जिससे ऐसी घटना दुबारा ना हो, क्योकि हमारी सरकारे ऐसी घटना पर दुःख व्यक्त करने के अलावा आज तक किया भी क्या हैं, क्योकि हमारे नेताओ को ऐसे मुद्दों पर राजनीती का जरिया मिल जाता हैं, दुःख तो उन्हें होता हैं जिसके घर से कोई चला गया हो, चाहे वो कोई हादसे का शिकार हो या देश का किसान हो चाहे जवान हो, हमारे देश की राजनीती इतनी गिर गयी हैं की जानवर और मनुष्य की मौत में अब फर्क नही समझा जाता हैं, आखिर कब तक सहेंगे हम ?
                              इन सत्ता की पार्टियो को सबक सिखाना हैं 
                                अबकी बार “ नोटा “ का बटन दबाना हैं 

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