कैसा होगा भारत जब सबको 12 हज़ार घर बैठ के मिलने लगेंगे

कैसा होगा भारत जब सबको 12 हज़ार घर बैठ के मिलने लगेंगे
आप सुबह उठ के लैट्रिन करने जाएँगे लैट्रिन करने के बाद पानी खोलेंगे पानी नही आयेगा क्योंकि पानी भरने वाले को घर बैठ के 12 हज़ार मिल रहे हैं वो काम करने क्यों आयेगा
आपका कूड़ा ले जाने वाला भी नही आयेगा आपको ख़ुद जाके फेंक के आना पड़ेगा
आप की बर्तन साफ़ करने वाली भी नही आयेगी आपको ख़ुद बर्तन साफ़ करना पड़ेगा
आपका घर साफ़ करने वाली भी नही आयेगी आपको घर भी साफ़ करना पड़ेगा
आपका खाना बनाने वाली भी नही आयेगी
किसी तरह सारा काम ख़त्म कर के आप बाहर निकलेगे पता चला ड्राइवर भी नही आया
आप बाहर रोड पे बस या आटो पकड़ने जाएँगे वो भी बंद मिलेगा क्योंकि उनको भी घर बैठ के 12 हज़ार मिलेगा
किसी तरह आप पैदल आफिस पहुचें वहाँ गार्ड भी नही मिलेगा आफिस भी बंद आपको ख़ुद आफिस का सटर उठा के अंदर जाना होगा आफिस मे भी गंदगी फैली होगी क्योंकि वहाँ भी सफ़ाई वाला आज नही आया किसी तरह आप अपना काम निपटाएगे आपको भूख लगेगी आप कैटीन में जाएँगे वहाँ भी कोई नही मिलेगा आपको चाय भी ख़ुद बनानी होगी और नाश्ता भी खुदा बनाना होगा
किसी तरह काम ख़त्म करके आप आफिस से घर के लिए निकलेंगे सब्ज़ी वाला भी कोई नही मिलेगा क्योकी सबको घर पे बैठे 12 हज़ार मिल रहे हैं
आप सापींग माल में जाएँगे वहाँ भी कोई गार्ड नही समान सब इधर उधर बिखरा रहेगा क्योंकि कोई उसको व्यवस्थित करने वाला नही आया सबको घर बैठे 12 हज़ार मिल रहे हैं
सामान के दाम भी इतने महँगे हो जाएँगे की आप ख़रीद नही पायेंगे क्योंकि कंपनियो में भी कोई काम करने नही जायेगा
और कोई किसान खेत में काम करने नही जायेगा अन्न भी पैदा नही होगा लोग भूखे मरने लगेंगे
क्योकी सबको घर बैठे 12 हज़ार मिलने लगे हैं
और हाँ इन 25 करोड़ लोगों को ये 12 हज़ार देने के लिए आप पे से ही 80 या 90 प्रतिशत टैक्स लगाया जायेगा आप भी घर बैठ जाएँगे क्यों इतनी मेहनत करना जब सब सरकार ही ले ले रही हैं आप भी 12 हज़ार के चक्कर में घर बैठ जाएँगे
देशते ही देखते ये 25 करोड़ ग़रीबों की संख्या 100 करोड़ पार कर जायेगी
कैसे चलेगा देश आप ही सोचिए
समस्या का हल ये नही की सबको 12 हज़ार दे दिया जाय सबको सक्षम बनाने पे ध्यान देना पड़ेगा सरकारो को तभी देश आगे बढ़ेगा ये लोक लुभावन वादों से देश नही चलेगा

Venezuela नामक देश के बारे में सुना है ??????

काफी बड़ा देश है । इतना बड़ा की हमारा पूरा UP , बिहार , पंजाब , हरियाणा , बंगाल उड़ीसा मिला दो , इससे भी बड़ा ……..

और जनसंख्या कितनी है ? सिर्फ साढ़े तीन करोड़ ……. याने दिल्ली NCR की आबादी से भी कम ……..

भगवान का दिया सब कुछ है । क्या शानदार उपजाऊ जमीन है , प्रचुर वर्षा होती है । सैकड़ों छोटी बड़ी नदियां है …… हज़ारों मील लंबा तो समुद्र तट ही है ……..

इतनी उपजाऊ जमीन और इतना पानी होने के बावजूद देश मे आज वो भुखमरी फैली है कि आदमी आदमी को मार के खा रहा है ……. देश मे खेती किसानी , फल सब्जी , dairy ,poultry , मछली , fishing जैसा कुछ है ही नही । मने इतना बड़ा देश अपने लिए गेहूं , चावल ,सब्जी नही उगा सकता ?????? लाखों वर्ग किलोमीटर के तो चारागाह हैं ……. ये नही की कुछ गाय , भैंस , भेड़ , बकरी ही चरा ले मुल्क ……. नदियों समंदर में मछली की भरमार है ,…

Venezuela फिर भी भूखा मर रहा है । मुद्रा स्फीति का ये हाल है कि बैग भर Bolivar (वेनेझुएला की करंसी) भर के ले जाओ तो भी एक पाकिट bread का नही मिलेगा ……. Inflation की दर पिछले साल की तुलना में 16,98,488 % है ।

आज आपको एक भारतीय रुपये के बदले में 3607 Venezuela की मुद्रा Bolivar मिलेगी ।

आपको ये जान कर भी आश्चर्य होगा कि Venezuela में दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के भंडार हैं ……. सऊदी अरबिया से भी बड़े ……..

आपको ये जान कर भी आश्चर्य होगा कि आज से सिर्फ 20 साल पहले Venezuela एक विकसित और संपन्न राष्ट्र था ,… पर इसके नेताओं की गलत नीतियों ने एक सम्पन्न राष्ट्र को सिर्फ 20 साल में भिखारी बना दिया ।

आज ये हाल है कि वेनेजुएला की अधिकांश लड़कियां Bread के सिर्फ एक टुकड़े के लिए अपना शरीर बेच रही है …….. वेश्यावृत्ति कर रही हैं ।

एक अच्छा leader अपने देश को 20 साल में सिंगापुर बना सकता है और एक नालायक leader अपने देश को Venezuela बना देता है ।

क्या गलती की थी वेनेजुएला के Leaders ने …….

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद , जब पूरी दुनिया मे तेल की जबरदस्त demand थी और दाम आसमान छू रहे थे , Venezuela की पांचों उँगलियाँ घी में थीं । 1945 में ही देश रोज़ाना 1 Million Barrel तेल बना रहा था ।

सरकार ने अपने नागरिकों को खैरात बांटना शुरू किया ।
देश की हर सेवा सरकारी थी और हर सेवा Free थी ।
तेल के बदले में दुनिया भर से सामान आता था , राशन , अनाज , फल ,सब्जी , दवाइयां , मशीनरी , कपड़ा हर चीज़ Import ही होती थी । तेल के बदले में ……. और सरकार अपने नागरिकों को सबकुछ फ्री देती थी ।

50 और 60 के दशक में जब कि सारी दुनिया हाड़ तोड़ मेहनत कर उत्पादन Manufacturing में लगी थी , Venezuela में एक सूई तक न बनती थी और उनकी तो गोभी और टमाटर भी यूरोप से आती थी ।

बहुत खूबसूरत देश है Venezuela..…… पर यदि कोई Tourist भूला भटका आ भी जाता तो पूरे देश मे कोई उसको पानी पूछने वाला न था …..… आमतौर पे ऐसे देशों में बाहर से विदेशी आ जाते हैं रोज़ी रोज़गार की तालाश में , पर चूंकि इस देश मे फ्री सेवा थी इसलिए सभी पार्टियां और जनता विदेशी लोगों के देश मे प्रवेश के खिलाफ थी कि , हमारी मुफ्त सेवा का लाभ विदेशी क्यों लें ।

इसका नतीजा ये हुआ कि कोई नागरिक खुद तो कुछ करता नही था , खेती बाड़ी , कोई उद्योग धंदा , और बाहर से लेबर ही import कर ले सरकार , ये होने नही देता था । इसलिए देश मे Tourism तक develop न हुआ ।

फिर एक समय बाद तेल के दाम गिरने लगे …….. सरकार की एक तेल कंपनी थी …… PDVSA …… सरकार ने कंपनी से कहा , सबको नौकरी दे दो ……. कंपनी बोली हुज़ूर हमको employee की ज़रूरत ही नही ……. सरकार बोली , फिर भी दे दो ……. इस तरह सरकार ने हर परिवार के कम से कम एक आदमी को सरकारी तेल कंपनी PDVSA में नौकरी दे दी जहां वो कोई काम नही करता था और मुफ्त की मोटी पगार लेता ……..
फिर तेल के दाम और गिरे …….. अब जब तेल कंपनी बुरी तरह घाटे में आ गयी और तेल बिकना बंद हो गया तो खैरात भी बंद हो गयी ………
धीरे धीरे हर चीज़ की कमी होने लगी ।

3.5 करोड़ मुफ्तखोर जिनने ज़िन्दगी में कोई काम नही किया था वो लूट खसोट करने लगे ।
लड़कियां सब वेश्यावृत्ति में उतर गई ।
समाजवादी सरकार फिर भी नही चेती …….. वो कर्ज़ा ले के घी पिलाने लगी अपनी मुफ्तखोर जनता को ……..

आज राजधानी कराकास दुनिया का सबसे असुरक्षित शहर है, जहां एक Bread के टुकड़े के लिए हत्या हो जाती है और 13/14 साल की लड़कियां सिर्फ एक पीस bread के लिए शरीर बेचती हैं ।

डेढ़ करोड़ बोलिवर में एक थाली खाना मिलता है ……..

1999 के बाद देश की ये दुर्दशा शुरू हुई …….

इतना बड़ा देश सिर्फ 3.5 करोड़ लोगों के लिए गेहूं चावल सब्जी दूध पैदा नही कर सकता ?????

मैं कहता हूँ …कि आज अगर वेनेजुएला की सरकार यहां पंजाब से सिर्फ 1000 किसानों को अपने यहां आमंत्रित कर ले और सिर्फ जरूरी मशीनरी दे दे तो सिर्फ 6 महीने में हमारे किसान इतना अनाज , सब्जी , फल और दूध पैदा कर देंगे कि पूरे वेनेजुएला से खाया न जाये ……..

अकेला एक कपूरथला जिला इतना खरबूजा पैदा करता है कि पूरा North India खाता है …….

सवाल है कि सरकार ने ये मुफ्तखोरी अपने नागरिकों को क्यों सिखाई ?

अपने देश की जनता को निकम्मा , नकारा , हरामखोर किसने बनाया ?

जब इतनी भुखमरी है देश मे तो भी क्या जनता अपने घर के पिछवाड़े घीया, तोरी, कद्दू के बीज सिर्फ डाल दे.. तो भी दो महीने में इतनी सब्जी हो जाएगी कि उसको उबाल के खा के पेट भर लेंगे लोग ……..

पिछले 10 साल से भुखमरी है देश मे …….. न सरकार चेती न जानता ???????

आज राहुल G चुनावी वादा कर रहे कि 5 करोड़ गरीब परिवारों को 6000 महीना 72000 सालाना दे के भारत मे 7 venezuela बनाना चाहते हैं । …

3.5 करोड़ लोगों का एक Venezuela है ।

राहुल G 25 करोड़ लोगों को मुफ्तखोर बनाना चाहते हैं यानी 7 Venezuela ………

राहुल G / कांग्रेस की इस मुफ्तखोरी योजना का बजट होगा 3 ,60,000 करोड़ रु यानी हमारे कुल रक्षा बजट से भी ज़्यादा ……..

Party सत्ता में वापसी के लिए इस देश को Venezuela बना देगी ………


Party से बचो …….

देश को बचाओ…

वाहरे राजस्थान सरकार

वाहरे राजस्थान सरकार…..

पुलिस की एक बहादुर जवान और देश की बेटी के शव को एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुई ।
खुली मालवाहक गाडी मे एक फोर्स की जवान की देह को पैरो के बीच रखकर दुखी मन से बेबस लाचार परिजन अपने कलेजे को लेकर जाने को विवश रहे, तब उनकी मनोस्थिति कितनी रोई होगी।
पुलिस के नालायक अफसरो की प्रताडना और शोषण से आहत बेटी कौ अपनी जीवनलीला समाप्त करनी.पडी..
साथ ही बाँडी को भी सम्मान नही दे पाये ये लोग..।

राष्ट्र में अन्याय

सांचौर की महिला पुलिस सिपाही गीता बिश्नोई ने पुलिस विभाग के अधिकारियों की ज्यादती के आगे थककर अपनी जान दे दी। आधी आबादी के प्रति अमर्यादित सोच उनके जीवन निर्वाह हेतु सरकारी सेवाओं में भागीदारी, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी आगे बढ़ाओ जैसी भावनाओं व देश के विकास में आधी आबादी के पूरे सहयोग लेने के प्रति प्रश्नचिन्ह ही लगा दिया है ?? यह घटना अतिनिंदनीय, अतिचिन्तनीय व अति गंभीर है , बहन गीता के परिवार को न्याय दिलवाने के साथ साथ हमे यह विश्वास दिलाना होगा कि ऐसी घटनाएं दुबारा न हो । मेरी सभी बहनों से भी निवेदन रहेगा कि आप इतनी शसक्त बने जो किसी की हिम्मत नही हो कि कोई आपको इस अंजाम तक पहुंचाए और आपको सुसाइड करने पर मजबूर होना पड़े। अगर समय रहते गीता की पुकार सुन ली जाती तो आज उसकी जान बच सकती थी पर विभाग, परिवार व संबंधियों ने हल्के में ले लिया और गीता को इस दुनिया से अलविदा कहना पड़ा । भविष्य में ऐसी घटना नही हो , यह हम सबको सुनिश्चित करना होगा हमे आधी आबादी को जीने के लिए पूरा हक देना होगा । आज देश के विकास में सहभागी बनकर महिलाएं हर विभाग , हर सेवा में बढ़चढ़ कर अच्छी सेवाए दे रही है फिर ऐसी घटनाएं क्यों घटित होती है?? हम आशा करते है हमारे पुरुष प्रधान समाज के भाइयों से कि एक सभ्य समाज व सभ्य देश के अच्छे नागरिक बनकर बहन बेटियों की इज्जत करें व उन्हें भी आगे बढ़ने व जीने का उचित अवसर प्रदान करें।
शत शत नमन ! गीता बिश्नोई